स्मार्ट फोन के बिना भी घर बैठे पढ़ाई कर रहे गरीब बच्चे शिव नाडर फाउंडेशन की अनूठी पहल, कोविड-19 के प्रोटोकाल का भी हो रहा पालन


सीतापुर, कोरोना काल में स्कूल और कॉलेज बंद हैं। सरकारी प्राइमरी स्कूलों में भी ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था की गई है। लेकिन यहां पढ़ने आने वाले गरीब बच्चों की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उनके अभिभावकों के पास स्मार्ट मोबाइल फोन नहीं हैं, यदि हैं भी तो रीचार्ज करना मुश्किल है। ऐसे में यह बच्चे कोविड-19 के प्रोटोकाल का पालन करते हुए एक बार फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से कैसे जुड़ सकें। शिव नाडर फाउंडेशन ने इस समस्या का अनूठा समाधान खोज निकाला है। 
अपनी योजना को पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में कसमंडा ब्लॉक के चार गांवों हर्रइया, ऊंचाखेरा अजई, कुरसंडा और मानपारा में 6 दिनों तक संचालित किया। बच्चों की पढ़ाई को लेकर बढ़ती रूचि और अभिभावकों की सकारात्मक प्रकिया देखने के बाद इस योजना को 6 अन्य गांवों बसेडीह, टेड़वा, उमरिया, मनिकापुर, असोधन और बिलरिया में भी शुरू किया गया। इन गांवों में भी इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। 
कोरोना काल में कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन भी होता रहे और बच्चों की पढ़ने-लिखने की ललक भी बनी रहे, इसको लेकर शिव नाडर फाउंडेशन ने शिक्षा की गूंज कार्यक्रम की शुरूआत की। कार्यक्रम के तहत चिन्हित गांवों में लाउड स्पीकर लगवाए गए। इसके बाद फाउंडेशन द्वारा गांव में संस्था के प्रौढ़ शिक्षा ( शिक्षा प्लस) कार्यक्रम के साथ जुड़े शिक्षित युवा जिनको जन शिक्षक और इन्स्ट्रक्टर कहा जाता है उन्होंने गांव में शिक्षा की गूंज कार्यक्रम की जानकारी पहुंचायी। गांव के ही एक घर में लगाए गए साउंड सिस्टम की मदद से गीत, कविता और कहानियों के माध्यम से अक्षर ज्ञान, गिनती और कोरोना के दौरान बरतने वाली सावधानी पर जानकारी दी गई। 
बच्चों की कक्षा शुरू होने से पहले लाउडस्पीकर पर संगीत के रूप में कार्यक्रम की एक प्रति ध्वनि बजाई जाती है। इस म्यूजिक ट्यून को मुंबई के म्यूजिक कंपोजर वेदांत शाह ने तैयार की है। इसके बजते ही समूचे गांव में शिक्षा का माहौल बन जाता है, और बच्चे कॉपी-किताब खोलकर पढ़ना और सुनना शुरू कर देते हैं। 
गांवों के चयन से पहले जाना की वह गांव कंटेनमेंट जोन में तो नहीं आता है, गांव में कोई कोरोना का उपचाराधीन व्यक्ति तो नहीं है, गांव के प्राथमिक विद्यालय में संस्था द्वारा लगाए स्मार्ट क्लास हैं और वहां संस्था द्वारा चलाए जा रहे प्रौढ़ शिक्षा के सेंटर हों। इसके बाद ग्राम प्रधान से मिल कर कार्यक्रम संचालन की टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी से कार्यक्रम के संचालन की अनुमति प्राप्त की। इसके बाद गांव में बच्चों को शिक्षा से पुन: जोड़ने के लिए शिक्षा की गूंज कार्यक्रम का संचालन शुरू किया गया। 
कार्यक्रम की सीनियर को-ऑर्डिनेटर प्रीती एम. शाह कहती हैं कि अपने कार्यक्रम के माध्यम से हमलोग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से तो जोड़ ही रहे हैं, साथ ही पूरे गांव के लोगों को कोविड-19 के प्रोटोकाल की भी जानकारी दे रहे हैं। जिन गांवाें में हमारा यह कार्यक्रम चल रहा है, वहां पहले बच्चे और बड़े मास्क का प्रयोग कम ही करते थे, लेकिन अब सभी लोग मास्क अथवा गमछा, रूमाल से अपने मुंह व नाक को ढके रहते हैं।


उमरिया गांव के प्रधान रामेंद्र अवस्थी का कहना है कि यह एक सराहनीय प्रयास है। इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति ललक पैदा हुई है, साथ ही ग्रामीणों में भी जागरूकता आई है। गांव के प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कमलेश कुमार कहते हैं कि यह एक रोचक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम है, इससे बच्चों में शिक्षा के प्रति रूझान बढ़ा है। मानपारा गांव की प्रधान वन देवी का कहना है कि इस पहल से गांव में शिक्षा की एक नई बयार चलने लगी है।