बिसवां, सीतापुर । बिसवां नगर में आपका खाता बिसवां स्टेट बैंक में है तो आप यह मत समझिये कि आप स्टेट बैंक के ग्राहक हैं । ग्राहकों को भी अपने अधिकार होते हैं लेकिन स्टेट बैंक बिसवां में सारे अधिकार सिर्फ कर्मचारियों के लिए सुरक्षित हैं। बैंक कर्मचारी बड़े उपभोक्ताओं को छोड़कर बाकी उपभोक्ताओं को किसी कर्जदार से कम नहीं समझते, यह कर्मचारी यह भूल जाते हैं कि उनकी तनख्वाह इन्हीं उपभोक्ताओं के लेनदेन से निकलती है।
8 जुलाई को बिसवां पत्थर शिवाले में रोहित नाथ सिंह की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद 250 मीटर के पूरे एरिया के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी तथा प्राइवेट प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद करा दिए गए थे। इन प्रतिष्ठानों में स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक तथा भागीरथी बैंक भी बन्द थे । जिनको आज 14 दिनों बाद खोला गया है हालांकि ज्यादातर बैंक के बड़े शहरों में यह प्रतिष्ठान सिर्फ 72 घंटे के लिए बंद किए जा रहे हैं लेकिन जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी को इस कोरोना काल में यह अधिकार प्राप्त है कि वह कोरोना पॉजिटिव एरिया के सभी प्रतिष्ठान 14 दिनों के लिए भी बंद करा सकते हैं।
आज जब 14 दिनों बाद बैंक खुले तो स्वाभाविक तौर पर उपभोक्ताओं की ज्यादा भीड़ होनी ही थी इसकी जानकारी प्रशासन तथा बैंक प्रबंधक को भी थी ऐसी स्थिति में आज बैंक के ज्यादा काउंटर खोलकर तेजी से काम करने की जरूरत थी लेकिन स्टेट बैंक बिसवां ग्राहकों की परेशानियों से इतना लापरवाह था कि उसने 12:00 बजे तक लेनदेन शुरू ही नहीं किया जबकि बड़ी तादाद में ग्राहक बैंक के बाहर भीड़ लगाए खड़े रहे, जो ग्राहक अंदर जाने की कोशिश करता उसको गेट पर खड़ा पुलिसकर्मी रोक देता और कहता कि 1 या 2 घंटे बाद काम शुरू होगा और इतना जरूर था कि अगर कोई बड़ा उपभोक्ता या प्रभावशाली व्यक्ति बैंक के अंदर जाता तो पुलिसकर्मी कुछ नहीं बोलता थे ।
जब इसकी शिकायत हमने उपजिलाधिकारी से फोन पर की तो उन्होंने बड़े ही शांत स्वर में कहा कि संयम रखिए बैंक कर्मचारी भी कोरोना से डरे हुए हैं वैसे अभी हम मैनेजर से कहे देते हैं।
अरे हुजूर हम तो संयम रखेंगे ही हम तो एक आम उपभोक्ता हैं तथा हम कहां सरेबाजार अपनी बेइज्जती करा पाएंगे और अपने ऊपर मुकदमा लिखवा पाएंगे । बैंक के बाहर लगी भीड़ को देखकर लगता है जैसे बैंक सालों बाद खुली है । गौर तलब बात यह भी है कि भारतीय स्टेट बैंक शाखा बिसवां में अधिकतर स्थानीय कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं जिनकी वजह से आम उपभोक्ताओं के साथ इस तरह के सलूक करना आम बात है । क्या क्षेत्रीय प्रशासन व बैंक के जिम्मेदार इस समस्या का निराकरण निकाल पाएंगे ।
लेकिन थोड़ी कोशिश करके बैंक के बाहर खड़ी भीड़ को तो देख लीजिए इनके भी परिवार हैं इनको भी कोरोना संक्रमण हो सकता है। आपको सिर्फ बैंक कर्मचारियों को ही नहीं बचाना है हमारे ऐसे सामान्य लोगों के लिये भी कोरोना संक्रमण से बचने ने के रास्ते बनाते रहिए।
यह हो सकता है कि बैंक कर्मचारी और प्रशासन यह दलील दे कि बैंक सेनेटाइज हो रहा था लेकिन बैंक कोई लाल किला तो है नहीं जिसको सैनिटाइज करने में बहुत समय लगे।
एक तरफ प्रशासन और सरकार 2 गज की दूरी बनाने पर जोर दे रहे हैं और प्राइवेट प्रतिष्ठानों पर ज्यादा भीड़ होने पर प्रशासनिक अधिकारी दुकानदार को हड़काते हैं, दुकान बंद करवा देने की धमकी देते हैं तथा ग्राहकों को सावधान करते हैं दूसरी तरफ जब बैंक की लापरवाही और मनमाने आचरण की वजह से बैंक के बाहर भारी भीड़ जमा होती है तो बैंक के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय ग्राहक से संयम बरतने की उम्मीद जताई जाती है आखिर यह दोहरा आचरण क्यों? जिस तरह से भीड़ बैंक के बाहर लगी थी उसमें अगर एक व्यक्ति भी कोरोना संक्रमित हो तो कितने लोग संक्रमित हो सकते हैं क्या इस पर भी प्रशासन गौर करेगा?
यह तो कोरोना काल का मामला है सामान्य दिनों में भी इस बैंक का रवैया सामान्य ग्राहकों के लिए निहायत मनमाना रहता है एक बार सुनने में आया था कि बैंक के इसी आचरण के चलते कुछ माह पूर्व सिविल जज जूनियर डिविजन बिसवां ने स्टेट बैंक मैनेजर को तलब भी किया था और गलती मानने पर इस हिदायत के साथ जाने दिया था कि आगे से सिविल कोर्ट के कर्मचारियों के साथ बैंक सम्मानजनक रवैया अपनाएगा।