एसएनसीयू के बच्चों पर मां की तरह प्यार लुटाती हैं स्टाफ नर्स

सीतापुर । जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में विशेष नवजात शिशुओं पर पहले उनकी मां ही प्यार व दुलार लुटाती हैं। हम बात कर रहे हैं यहां पर तैनात स्टाफ नर्सों की, जो 24 घंटे मां की भूमिका में रहकर नवजातों की देखभाल करती रहती हैं। इन बच्चों की किलकारियां यहां की स्टाफ नर्सों के चेहरों की मुस्कान को बढ़ा देती हैं । यहां पर वर्तमान में कुल आठ स्टाफ नर्स तैनात हैं। कहने को तो वह  यहां पर अपनी ड्यूटी करती हैं, लेकिन यह ड्यूटी कब ममता और अपनत्व में बदल जाती है, इन्हें खुद ही पता नहीं चलता है। समय से पूर्व जन्म लेने वाले अथवा अस्वस्थ नवजातों को पूरी तरह से स्वस्थ करने की जिम्मेदारी इनके कंधों पर होती है। इन बच्चों के रोने की आवाज सुनकर दौड़ी चली आती हैं, और बच्चों पर जी भरकर प्यार लुटाती हैं। यह नर्सें तब तक मां की भूमिका निभाती हैं, जब तक यह नवजात पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपनी मां के आंचल में नहीं चले जाते हैं। यहां ऐसे बच्चे रखे जाते हैं जिनका जन्म नौ माह से पहले हुआ हो अथवा उनका वजन कम हो। इन नर्सों के सामने इस बात की चुनौती होती है कि समय से पूर्व जन्में बच्चे को किस तरह से स्वस्थ बनाया जाए। इस घड़ी में उसके साथ उसे जन्म देने वाली मां अथवा परिवार का कोई दूसरा सदस्य भी नहीं होता है। ऐसे में यह नवजातों को ट्यूब फीडिंग, स्पून फीडिंग या फॉर्मूला फीडिंग कराती हैं। यहां के प्रभारी डॉ. एसएन वर्मा कहते हैं कि इन नर्सों के कामों को  बेहद करीब से देखा है। यह अपने दायित्वों को सिर्फ ड्यूटी समझकर नहीं बल्कि एक मां के रूप में पूरा करती हैं। 
इस यूनिट की शुरूआत फरवरी 2016 में हुई थी। अब तक यहां पर 7,623 बच्चे भर्ती किए जा चुके हैं। यहां पर तैनात प्रियंका, मंजू, सुनीला, शिल्पी, काव्या, इंदू, सरिता और अजीत बच्चों पर जी भरकर ममता उड़ेलती हैं। इन स्टाफ नर्सों का कहना है कि इन नवजातों की देखभाल करना एक  बड़ी चुनौती होती है इनकी देखभाल करते करते जुड़ाव बहुत ज़्यादा हो जाता है। बच्चों को तब तक नहीं छोड़ते हैं जब तक  उनका वजन 1500 ग्राम से ज़्यादा न हो जाए। इन शिशुओं के साथ जुड़ाव काफी अच्छा लगता है। बच्चे जब कई कई दिन रह लेते हैं तो काफी जुड़ाव हो जाता है। भेजते वक्त मन भर आता है।